अध्याय 7 ~ आशा की किरण

तीसरे अध्याय में हमें परमेश्वर की कई खूबियों को जानने का मौका मिला। परमेश्वर न सिर्फ बेहतरीन कारीगर और काबिल शख़्सियत है, बल्कि वह मोहब्बत और वाजिब रिश्तों के जनक भी हैं। अगर वह प्रेम नहीं करता तो इस दुनिया में प्रेम का कोई वजूद ही नहीं होता।

पर अफसोस जहां प्रेम होता है वहाँ उसका विरोध भी होता है जैसे प्रेम का अभाव होना। ठीक वैसे ही जैसे आप अँधेरे में ही उजाले को और बखूबी से देख पाते हैं। पर इस संसार में जहां प्रेम मौजूद है वही लोगों में दिखावा, नफरत और स्वार्थ भी है

परमेश्वर ने हमें अपने प्यार का इजहार करने के लिए बनाया है

परमेश्वर प्रेम है और वह हमसे प्रेम करता है। और वो अपने प्रेम को हमारे साथ बांटना चाहता है। वो हमसे इतनी मोहब्बत करते हैं कि सदियों की जिद, बेवफाई, नफरत और बगावत के बाद भी वो हम इंसानों के साथ सब्र से पेश आते हैं। हमारे बुरे बर्ताव के बावजूद, वह सब्र रखते है और हर एक को मौका देना चाहते है खुदा की हुज़ूरी में आने का।

परमेश्वर ने हमें बनाया, क्योंकि वह हमसे मोहब्बत करता है। इसलिए नहीं कि उन्हें नौकर के रूप में उनकी खिदमत करने के लिए ग़ुलामों की जरूरत थी। उन्हें ग़ुलामों की ज़रुरत भला क्यों होगी? वह अपनी बनाई हुई सृष्टि से प्रेम करते है और अपने प्यार को हमारे साथ बांटना चाहते है जितना हम एहसास कर सकते हैं उससे कहीं ज़्यादा।

लेकिन हम बाग़ी हैं और हमने हमेशा से ही परमेश्वर की बेइज़्ज़ती की हैं।

सबसे पहले, आपको अपने हालात को समझने की जरूरत है। क्या आपको इस बात का एहसास है कि आप अंधेरे में रहते हैं? और ऐसे हालातों में परमेश्वर आपसे प्रेम नहीं कर सकते, क्योंकि वह आपकी गलतियों या यूं कहे गुनाहों को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते। हमने उनकी बेइज़्ज़ती की है जो की एक संगीन जुर्म है और हमारे गुनाहों की मांग है कि इसका इंसाफ किया जाए। हर बार जब हम कुछ भी गलत करते हैं तो हमारे और परमेश्वर के बीच की दूरी बढ़ जाती है।

लेकिन हमारे पास आशा की एक किरण है! परमेश्वर उन सभी लोगों को पूरी तरह से माफ करना चाहते है जो अपने गुनाहों का इकरार करते है और अपनी पुरानी गुनाहों की ज़िंदगी से तौबा करते है

यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्‍वासयोग्य और धर्मी है। यदि हम कहें कि हम ने पाप नहीं किया, तो उसे झूठा ठहराते हैं, और उसका वचन हम में नहीं है। 1 यूहन्ना 1:9-10

परमेश्वर हमारे और उनके बीच के रिश्ते को दुरुस्त करना चाहते है। लेकिन इसके लिए वह हमें मजबूर नहीं करते। वह हर उस व्यक्ति को अपनाने के लिए तैयार है जो उनके शाश्वत प्रेम को प्राप्त करना चाहता है।

यहाँ आपको यह बात समझनी पड़ेगी कि आप कभी भी खुद की मेहनत से परमेश्वर के प्रेम को अर्जित नहीं कर सकते। पश्चाताप और अच्छे कार्य करके भी अपने पापों की भरपाई नहीं कर सकते। हमने देखा है कि वह यूं ही हमें माफ नहीं कर सकते, क्योंकि परमेश्वर न सिर्फ केवल प्रेम करने वाले परमेश्वरहै, बल्कि वो एक न्यायी परमेश्वर भी है। हमने देखा है कि वह ऐसे ही क्षमा नहीं कर सकते क्योंकि परमेश्वर सिर्फ प्रेम करने वाले परमेश्वर ही नहीं, बल्कि न्यायी परमेश्वरभी है ।

अपने बुरे कामों का पश्चाताप करने से और परमेश्वर के प्रति अपने मन में आदर जगाना ही काफी नहीं है। अपने बुरे कामों को ठीक करने के लिए आपको कुछ करना पड़ेगा जिससे आपने दूसरों की भावनाओं को चोट पहुचाई है और परमेश्वर को अपमानित किया है। हमें इस बात को भली-भांति समझना पड़ेगा की जैसा परमेश्वर चाहते है हम वैसी ज़िंदगी नहीं जी सकते, एक दिन भी नहीं। हमने यह भी देखा है कि वह हमारी गलतियों को यूं ही नहीं माफ कर सकते। अगर वो ऐसा करते हैं तो वो एक अन्यायी और धोखेबाज़ कहलायेंगे।

अपने बागी स्वभाव की वजह से आप परमेश्वर के सामने उपस्थित ही नहीं हो सकते। तुम परमेश्वर से और दूर हो गये हो और अनाथ हो गये हो। आप इसे अपने खाली और व्यर्थ जीवन के रूप में अनुभव कर सकते हैं। आप अपने बनानेवाले के साथ संबंध खो चुके हैं।

लेकिन अंत में, परमेश्वर ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहता हैं।

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परमेश्वर क पास इसका एक अद्भुत उपाय है।

बिना बाहरी मदद के आप परमेश्वर के बिना एक लक्ष्यहीन जीवन जीएंगे, जिसका अंत आखिरकार मृत्यु होगा। परमेश्वर जानते है कि आप कभी भी एक सिद्ध जीवन नहीं जी सकते, जैसा उन्होंने चाहा था। मनुष्य को बनाने से पहले ही, उनके पास एक योजना थी। उसने अपने सम्मान को बहाल करने और आपको आपके अपराध और शर्म से पूरी तरह से आजाद करने की एक योजना बनाई हैं। यह सिर्फ एक माफ करने जैसा और दया दिखाने जैसा कोई आसान काम नहीं हैं। अगर ऐसा होता तो यह अन्यायपूर्ण होता जो उसके सम्मान को कम कर देता। उसने हमे माफ करने की जो योजना बनाई है वो उसके असीम प्रेम को दर्शाती है जो वो हमसे करता हैं।

और आखिरकार आपको बचाने क लिए परमेश्वर ने स्वयं ही वह दंड ले लिया जो आपको मिलने वाला था! उसने आपके पापों के ऋण को चुकाया और इसलिए अब परमेश्वर अपने न्याय, सम्मान और भरोसे से समझौता किये बिना आपको क्षमा कर सकता है।

क्या आप इस शानदार योजना के बारे में जानना चाहते हैं?

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